नुट्रिशन एंड डायटेटिक्स

ये है हेल्थ का सीधा फंडा | Health Tips

ये है हेल्थ का सीधा फंडा | Health Tips

सभी को आदर आदाब और खूब खूब अभिनंदन। दोस्तों, जैसा कि आप सब जानते हैं हम जो खाना खाते हैं उसका हमारे मस्तिष्क पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है इसलिए हम कुछ health tips के बारे में बताने जा रहे है । जैसा कि कहा भी गया है ‘‘जैसा खावें अन्न, वैसा होवे मन।’’ आपने सुनील शेट्टी का वो डायलाॅग तो सुना ही होगा दोस्तों जिसमें वो कहते हैं ‘‘अन्ना, 24 घंटे चैकन्ना’’। तो बस कुछ इसी तरह हम भी चैबीसों घंटे चैकन्ने रहते हैं आपके नाॅलेज की पोटली को इन्फोटेन्मेंट अंदाज़ में भरने के लिए। आज हम आपके लिए एक ऐसी ही रोचक जानकारी लेकर आ गए हैं।

आपने न्यूट्रीशन health tips के बारे में तो सुना ही होगा। ये एक ऐसा फैटक्र है जिसपर हमारी पूरी लाइफ यहां तक कि हमारा लाइफस्टाइल भी डिपेंड करती है। इसी को हिन्दी भाषा में पोषण कहा जाता है। हम तो अच्छा खाना खाकर पोषण प्राप्त कर लेते हैं और हेल्दी लाइफ जीते हैं लेकिन इस देश में ऐसे लाखों बच्चे हैं जो आज भी कुपोषण का शिकार हैं। खैर इस गंभीर विषय पर भी आपसे चर्चा करेंगे लेकिन फिर कभी। आज हमारा फोकस है न्यूट्रीशन पर। अगर हम अपने डाइट प्लान को न्यूट्रीशन के अनुसार नहीं बनाएंगे तो हमें भी कुपोषण या किसी अन्य बीमारी को अपनी लाइफ में एंट्री देनी पड़ेगी। इससे बचने का कोई चांस ही नहीं है बाॅस। सिर्फ एकिच चांस है कि अपन को अपनी खाने की आदतों को थोड़ा चेंज करना मंगता। चलिए आपको आसान भाषा में समझाते हैं कि ये पूरा फंडा आखिर है क्या?

  • दरअसल, चाहे मनुष्य हों या फिर जीव जंतु। हम सभी को कुछ भी काम करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। यह ऊर्जा हमें वैसे तो किसी भी प्रकार का खाना खाने से मिल जाती है लेकिन उसमें वो बात नहीं रहती जो न्यूट्रिशन भरे फूड को खाने से हमें मिलती है। न्यूट्रिशन यानि कि पोषण के अलग अलग प्रकार होते हैं जो हमें विभिन्न प्रकार से मदद करते हैं। यदि हमें इन्सटैंट एनर्जी चाहिए तो हमें कार्बोहाइड्रेड से युक्त खाना खाने की जरूरत होती है।
  • तो वहीं दूसरी ओर अगर हम रोगों से लड़ना चाहते हैं तो हमें ऐसे खाने की जरूरत होती है जो कि विटामिन से भरपूर हो और रोगों से लड़ने में हमारी मदद कर सके। उनको संग्रहित करने वाले खाद्य पदार्थ भी अलग होते हैंद्य चलिए जानते हैं कि कौन कौन से प्रकार होते हैं न्यूट्रिशन के। तो दोस्तों, इस फैमिली में शामिल हैं प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, कार्बोहाईड्रेट, फैट या वसा, पानी और जिंक। सबसे पहले बात कर लेते हैं प्रोटीन की। जी हां, वही प्रोटीन, जिसे पाने के लिए बाॅडी बिल्डर्स क्या कुछ नहीं करते। यहां तक कि प्रोटीन अगर डाइट से पूरा नहीं हो पाता तो सप्लिमेंट्स लेकर प्रोटीन की कमी को पूरा करते हैं। प्रोटीन न केवल हम इंसानों का बल्कि जीव जंतुओं का भी मोस्ट वाॅन्टेड थिंग है। प्रोटीन के बहुत सारे फायदे हैं। साथ ही इसके नुकसान भी होते हैं जिनके बारे में हम आपसे आगे चर्चा करेंगे। प्रोटीन की मदद से ही शरीर में हुई किसी भी प्रकार की क्षति को हम पूरा कर सकते हैं। इसका मुख्य काम ही होता है रोगों को ढिशुम-ढिशुम करना और उनसे लड़ने वाले सेल्स को बिल्ड करना। आइए अब इसके फायदों के बारे में जान लेते हैं।

    प्रोटीन लेने के फायदे health tips :

  • प्रोटीन की रोग प्रतिरोधक क्षमता लाजवाब होती है।
  • प्रोटीन से भूख नियंत्रित रहती हैद्य भूख का संतुलन निर्धारित होता है।
  • प्रोटीन शरीर की कार्यप्रणाली को काफी हद तक सुरक्षित रखता है।
  • प्रोटीन के सेवन से तनाव को कम किया जा सकता है।
  • प्रोटीन वजन कम करने में काफी ज्यादा सहायक है।
  • प्रोटीन बालों और त्वचा को खोई हुई रंगत लौटा देता है।
  • प्रोटीन के सेवन से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
  • प्रोटीन के सेवन से शरीर में रक्तकोशिकाए नाखून, त्वचा, बाल और अन्य अंगों का निर्माण एवं मरम्मत होती हैं।
  • प्रोटीन की मदद से ऊतकों एवं कोशिकाओं की मरम्मत होती है।

अब आपको बताते हैं कि प्रोटीन लेने के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं।

प्रोटीन के नुकसान

  • प्रोटीन के अत्यधिक सेवन से किडनी संबंधित रोग हो जाते हैं।
  • प्रोटीन से मूत्र संबंधी रोग होते हैं।
  • प्रोटीन के अत्यधिक सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है और यह हृदय के लिए काफी ज्यादा नुकसान होता है।
  • प्रोटीन का प्रतिशत दैनिक जीवन की कैलोरी में केवल 30ः होना चाहिए।

प्रोटीन के स्रोत

सोयाबीन, अरहर, मीट, अंडा, मूंग, राजमा, कद्दू और मछली, इत्यादि।

मिनरल और विटामिन health tips

इन दोनों की तुलना हम सिंघम से कर सकते हैं। जहां एक ओर हमारे शरीर में मौजूद प्रोटीन मरम्मत का काम करता है। तो वहीं, मिनरल और विटामिन शरीर में कार्यप्रणाली को देखते हैं। जैसे अगर बाॅस नजर न रखे तो इम्प्लाॅई भी ढीले पड़ जाते हैं। काम ठीक तरह से नहीं करते ठीक उसी प्रकार पोषण के ये दोनों प्रकार इंस्पेक्शन करते हैं और बाकी पोषक तत्वों की कार्य प्रणाली को जांचते हैं कि वो ठीक से काम कर भी रहे हैं या फिर नहीं। साथ ही हमारी बाॅडी को सुचारू रूप से चलाने में भी मददगार होते हैं।

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संतुलित भोजन वहीं है जिसमें विटामिन और मिनरल से भरे खाने को रखा जाए। अब जानते हैं कि विटामिन कितने प्रकार के होते हैं? ये कई प्रकार के होते हैं जैसे विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन डी, विटामिन सी, विटामिन बी काॅम्प्लेक्स आदि health tips । हर विटामिन का एक अलग काम होता है। जैसे कि विटामिन ए का प्रयोग हमारी आंखों की कई सारी प्राॅब्लम्स को ठीक करने के लिए किया जाता है।

साथ ही यह आंखों की रौशनी भी बढ़ाता है। यह रतौंधी को ठीक करता हैद्य विटामिन ए, विटामिन के, विटामिन डी और विटामिन ई हमारी बाॅडी में वसा यानी फैट को बनाते हैं जो कि मांसपेशियों के निमार्ण और विकास में मदद करते हैं। बात करें विटामिन सी और बी की तो ये दोनों जलीय विटामिन होते हैं। हमारे ब्लड की शुद्धता इसी पर निर्भर करती है। साथ ही ये विटामिन हमारी बाॅडी में ब्लड का निर्माण भी करते हैं। ये विटामिन जलीय होते हैं। इस कारण ये ज्यादा देर तक हमारी बाॅडी में नहीं रहते हैं। इन्हे समय.समय पर लेते रहना जरूरी है।

विटामिन और मिनरल के फायदे health tips

  • विटामिन एवं  health tips मिनरल हड्डियों की स्वस्थता के लिए काफी ज्यादा आवश्यक तत्व हैं। यदि विटामिन और मिनरल का शरीर में संतुलन न बना रहे तो हड्डियां टूटने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है क्यूंकि हड्डियों के जोड़ की प्रतिरोधी क्षमता खो जाती हैद्य हड्डियों के लिए विशेष रूप से आवश्यक तत्व विटामिन डी और विटामिन के हैं। इन दोनों की मौजूदगी के बिना हड्डियां कैल्शियम ग्रहण नहीं कर सकती हैं।
  • मेटाबोलिज्म रूदृ मेटाबॉलिज्म एक प्रकार की प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत, पोषक तत्वों को संग्रहित किया जाता है और उन्हे समय समय पर जलाया जाता है। ऐसे पोषक तत्वों में संग्रहित होने वाले तत्व केवल मिनरल और विटामिन ही होते हैं क्यूंकि इन्ही के अंदर संग्रहित होने की विशेषता होती है।
  • हृदय :- विटामिन और मिनरल का सबसे ज्यादा फायदा हमारे हृदय को होता है। दरअसल विटामिन के कुछ प्रकार :- ए, सी और ई के साथ बीटा केरोटीन में एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं। ये हृदय को शुद्ध रखते हैं और रक्त की शुध्दता बनाए रखते हैं। विटामिन बी 3 और नियासीन की मौजूदगी के कारण कोलेस्ट्रोल लेवल भी काफी ज्यादा कम हो जाता है।

विटामिन और मिनरल के नुकसान

  • विटामिन का यदि ज्यादा सेवन किया जाए तो पेट दर्दए डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती है।
  • ये फास्फोरस का निर्माण करते हैं जिससे कई सारे ऊतकों को नुकसान पहुंचता है।
  • यदि इन्हे चिकित्सक के परामर्श के बिना नहीं लिया गया तो ये नकारात्मक कार्य करते हैं।
  • यदि प्रतिदिन आप 10 मिलीग्राम से ज्यादा विटामिन बी का सेवन करते हैं तो आपको लकवा मारने की संभावनाएं कई गुणा बढ़ जाती हैं।
  • ये ज़िंक का भी निर्माण करते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को क्षति पहुंचाता है।

विटामिन और मिनरल के स्रोत

विटामिन और मिनरल वैसे तो हर प्राकर के खाने में मौजूद रहते हैं। परंतु मीटए सूखे मेवे और दालें इनका मेन सोर्स है।
3. कार्बोहाइड्रेटकार्बोहाइड्रेट भी सबसे विशेष पोषकों में से एक है। यह हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी तत्व है। क्यूंकि यह शरीर को इंस्टैंट एनर्जी देता है। कार्बोहाइड्रेट की मदद से ही हमारी बाॅडी में पानी की कमी पूरी होती है। इसका कारण है कार्बोहाइड्रेट में मौजूद ऑक्सिजन और हाइड्रोजन

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसमें मौजूद ऑक्सिजन और हाइड्रोजन का रेशियो भी जल जितना ही है। कार्बोहाइड्रेट एनर्जी के मुख्य स्रोतों में से एक है। अगर खाने में इसका सेवन न करें तो शरीर कार्य काम करना बंद कर सकता है।

एक साधारण इंसान को 225 से 335 ग्राम कार्बोहाइड्रेट की जरूरत हर दिन होती है। अगर इसे कैलोरी में गिनें तो यह करीब नौ सौ से तेरह सौ कैलोरी देता है।

कार्बोहाइड्रेट के प्रकार

कार्बोहाइड्रेट बेहद महत्वपूर्ण पोषक है और यह करीब हर खाद्य पदार्थ में मौजूद होता हैद्य कार्बोहाइड्रेट के प्रकार निम्न हैं :-

  • चीनी :- वे सभी खाद्य पदार्थ जो मीठे होते हैं उनमें कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है। इस प्रकार के कार्बोहाइड्रेट से दैनिक जीवन के कार्यों के लिए काफी ज्यादा ऊर्जा मिलती है।
  • फाइबर :- फाइबर का निर्माण भी शुगर के कारण ही होता है। यह मुख्य तौर पर पाचन तंत्र में सहायता करता है।
  • स्टार्च :- यह कार्बोहाइड्रेट का मुख्य प्रकार होता है और यह कार्बोहाइड्रेट के अन्य प्रकार शुगर के कारण होता है।

कार्बोहाइड्रेट के लाभ health tips

  • यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।
  • कार्बोहाइड्रेट शरीर को तुरन्त ऊर्जा प्रदान करते हैंए एवं चुस्त दुरुस्त करने में सहायक होते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट की मदद से मोटापे को भी कम किया जा सकता है।
  • कार्बोहाइड्रेट शरीर को विभिन्न तरह के रोगों से बचाता है।

कार्बोहाइड्रेट के नुकसान

  • यह ग्लूकोज में रक्त की मात्रा बढ़ा देता है।
  • यदि कार्बोहाइड्रेट का सेवन ज्यादा किया जाए तब यह सीधा घात हृदय पर करता है और इसका प्रभाव हमारे दिमाग पर भी पड़ता है।
  • कार्बोहाइड्रेट यदि अधिकता से लिया जाए तो यह मोटापे को काफी तेजी से बढ़ाता है।
  • इसके कारण याददाश्त पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • कार्बोहाइड्रेट की अधिकता से बीमारियां जैसे :- डीमेंशिया, एल्जाइमर इत्यादि होती हैं।

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत

  • फाइबर :- फाइबर, सब्जियों साबुत अनाजों और अन्य प्रकार के सूखे अनाजों एवं मेवों में पाए जाते हैं।
  • चीनी :- यह दूध और दूध से बने अन्य तत्वों में पाई जाती है। इसके अन्य स्रोत फल और सब्जियां हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा विस्तृत पोषण है इस कारण यह काफी सारे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। इसके प्रकार भी अलग अलग पदार्थों में पाया जाता है।
  • कार्बोहाइड्रेट अलग अलग प्रकार की हर वह खाद्य वस्तु जिसमें शर्करा होती हैए उसमें पाया जाता है।
  • स्टार्च :- स्टार्च, बीन्स मटर और अन्य अनाजों में पाई जाती हैं।

4. फैट
दोस्तों, हमारी बाॅडी के लिए फैट का होना बहुत जरूरी है। यह एक इंपाॅर्टेंट पोषक है। हमारे शरीर के ऐसे कई सारे काम हैं जो केवल वसा यानी फैट की मदद से ही हो सकते हैं। यह तुरन्त ऊर्जा या एनर्जी भी प्रदान करता है और साथ ही साथ उस ऊर्जा का संरक्षण भी कर सकता है।

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वसा के स्रोत

  • वसा के मुख्य स्रोत हैं :- मांस, दूध से बने पदार्थ, सूखे मेवे और हरी सब्जियां।
  • वसा लगभग उन सभी खाद्य पदार्थों मे मौजूद होती है, जिनमें कार्बोहाइड्रेट होते हैं और इसके कार्य भी लगभग कार्बोहाइड्रेट जैसे ही होते हैं।
    पोषण की आवश्यकता क्या है?
    चाहे मनुष्य हो या फिर जीव जंतु, किसी को भी जिन्दा रहने के लिए कुछ क्रियाओं को करना बहुत जरूरी होता है। इन्हीं क्रियाओं को करने के लिए हमें अपनी बाॅडी में पोषण की आवश्यकता होती है। चलिए अब आपको ये भी बता देते हैं कि पोषण के कौन-कौन से कार्य हैं।
  • शारीरिक मरम्मत :- पोषण का दूसरा कार्य शरीर की मरम्मत करना भी होता हैद्य जिस तरह आप देखते हैं मशीन में डाला गया ईंधन केवल उसे चलाता है, वहीं शरीर में ऊर्जा के लिए अवशोषित किया गया ईंधन न केवल ऊर्जा देता है बल्कि शरीर की क्षतिपूर्ति भी करता है।
  • पाचन नियंत्रण रू. पोषण तत्व शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू ढंग से चलाने में काफी ज्यादा सहायक होते हैंद्य ये पाचन तंत्र से लेकर हृदय प्रणाली तक को स्वस्थ रखते हैं।
  • ऊर्जा :- पोषण का कार्य ऊर्जा देने का सबसे अधिकण् है। बिना पोषण के ऊर्जा दिए कोई भी सजीव जीवित नहीं रह सकता है।

प्रतिदिन कितना कितना पोषण जरूरी है? health tips

हमारे शरीर में पोषण कितना होना चाहिए यह व्यक्ति पर निर्भर करता है। अगर किसी व्यक्ति का शरीर पूरी तरह से स्वस्थ एवं तंदुरुस्त है तो उसे कम पोषण की जरूरत है। तो वहीं यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसकी बाॅडी को ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्वों की जरूरत होती है ताकि वो उस बीमारी से लड़ सके। यदि कोई व्यक्ति युवा है तो वो बैलेंस्ड डाइट लेगा। साथ ही अगर कोई बच्चा है तो उसे ज्यादा पोषण की जरूरत है। अगर कोई बुजुर्ग व्यक्ति है तो उसे भी पोषण की कम जरूरत पड़ती है।
आम तौर पर देखा जाए तो आपको अलग अलग पोषण की आवश्यकता निम्न मानकों health tips पर होती है।

  • ज़िंक :- 10.20 प्रतिशत ज़िंक सेहत के लिए फायदेमंद होता है। यदि इससे ज्यादा ज़िंक का सेवन किया जाए तो वह हानिकारक दिशा में कार्य कर सकता है।
  • कार्बोहाइड्रेट : कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता लगभग 900 से लेकर 1300 कैलोरी होती है, यदि आप ज्यादा खाते हैं तो यह आपके कुल भोजन का 45ः से लेकर 65ः तक होना चाहिए।
  • मिनरल :- यह भोजन का कुल 50ः होना चाहिए।
  • प्रोटीन :- प्रोटीन की आवश्यकता कुल 64 ग्राम तरल पदार्थो में होती है और इतना ही लगभग ठोस पदार्थों में भी। गौरतलब है कि इतने प्रोटीन से आप कुल 256 कैलोरी प्राप्त करते है और दिन भर में कुल 600 कैलोरी प्रोटीन आवश्यक होता है।
  • विटामिन : –  विटामिन की आवश्यकता आपकी संरचना पर निर्भर करती है। संपूर्ण खाने का 55ः विटामिन होना आवश्यक है। विटामिन बी का सेवन 10 ग्राम से ज्यादा न करें।
  • वसा :– वसा का निर्धारण कार्बोहाइड्रेट पर निर्भर करता है। यदि कार्बोहाइड्रेट कम हो तो वैसे ज्यादा रखें।
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